जब प्यार ने ठुकराया, तो पागल हो गए थे अकरम राही…

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akram rahi

जिस कैसेट ने अकरम को गायकी का बादशाह बनाया था, उसे बेचने के लिए वे खुद एक-एक दुकान पर गए थे, लेकिन दुकानदारों ने उसे खरीदने से इनकार कर दिया था।

—एन. नवराही

भारत और पाकिस्तान, दोनों के पंजाबों का कल्चर सांझा है, भाषा सांझी है और संगीत भी। दोनों मुल्कों के बहुत सारे गायक दोनों जगहों पर समान रूप से सुने और पसंद किए जाते हैं। ऐसे नामों में लोक गायक अकरम राही का नाम भी शामिल है, जिनका गीत “लुक लुक दुनिया तो असीं रोंदे रहे, तेरीआं जुदाइयां वाले दाग धोंदे रहे’ दोनों देशों में समान रूप से मक़बूल हुआ था।
दुनिया में शायद ही कोई ऐसा पंजाबी संगीत प्रेमी होगा, जिसने अकरम राही के दर्द भरे गीत न सुने हों। मगर आपको बता दें कि यह अपार सफलता अकरम राही को आसानी से नहीं मिली। इसके पीछे बहुत ही सघर्ष भरी कहानी है।
akram rahi
अकरम राही का जन्म सन 1968 में पिता गुलाम हैदर बाजवा के घर गांव स्यालकोट के गांव तलवंडी इनायत ख़ां में हुआ। तीन भाइयों और तीन बहनों का यह भाई ऐसे समय में पैदा हुआ, जब परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी। बचपन से ही गाने-गुनगुनाने का शौक हो गया। दस्वीं की पढ़ाई गांव के स्कूल से की और इसी दौरान शायरी पढ़ने का चस्का भी लग गया। पहला प्यार भी इन्हीं दिनों में परवान चढ़ना शुरू हो गया। जीवन यापन करने के लिए कई तरह के पापड़ बेलने पड़े। बस कंडक्टरी की, बसों को धोया। मगर मन असल में कहीं और ही रमना चाहता था।

जैसे-तैसे जीवन बसर हो रहा था कि एक घटना घटी, जिसने पूरे जीवन को बदलकर रख दिया। जिस लड़की से प्रेम करते थे, मुफलिसी के दिनों में वह किनारा कर गई और किसी और से निकाह करवा लिया। जब यह बात अकरम राही को पता चली तो वह यक़ीन न कर पाए। जब ख़ुद देखा तो दिल को धक्का लगा। बेहोश हो गए। जब होश आया, तो पागलख़ाने में थे। डॉक्टरों का कहना था कि अब यह ठीक नहीं हो पाएंगे। मगर क़ुदरत को कुछ और मंजूर था। कुछ महीनों में ही वह ठीक हो गए। वहां काम करने वालों ने बताया कि वह अक्सर अपने साथ वालों को गीत सुनाया करते थे। इसके बाद डॉक्टरों ने यह ताकीद की कि इन्हें गाने से मना न किया जाए। शायद इसी वजह से यह ठीक हो पाए हैं।

ठीक होने के बाद दोस्तों ने हौसला दिया कि आवाज़ अच्छी है, तो कैसेट रिकॉर्ड करवाई जाए। दोस्तों की मदद से कैसेट रिकॉर्ड करवाई। फिर कैसेट रिलीज़ करवाने की समस्या आड़े आ गई। कोशिशों के बाद जब पाकिस्तान म्यूज़िक कंपनी ने कैसेट रिलीज़ की तो इसे बेचने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। वह जब भारत आए थे तो बताया था कि कैसेट बेचने के लिए वह ख़ुद लोगों के पास जाते, मगर कोई उसे ख़रीदने को तैयार न होता। फिर कैसेट लोगों को फ्री देनी शुरू की। हद तो तब हुई, जब एक एक दुकानदार ने इस कैसेट को मुफ्त में लेने से भी इंकार कर दिया। मायूसी ने घेर लिया। आख़िर अम्मी ने ढांढस बंधाया कि कोई बात नहीं, तुम्हारी मेहनत को फल ज़रूर लगेगा।

और फिर एक दिन अल्लाह ने नज़दीक होकर अम्मी की दुआ सुन ली। म्यूज़िक कंपनी से फोन आया कि आकर मिलें। वहां पहुंचे तो सारे अधिकारी गले मिले और बताया कि तुम्हारी कैसेट ने धूम मचा दी है। पूरे 13 दिन कराची और फैसलाबाद में कैसेट का रैपर छपता रहा, मगर लोगों की मांग पूरी नहीं कर पा रहे। कंपनी वालों ने पैसा तो दिया ही, ये देखने के लिए कराची के लिए फ्लाइट का टिकट भी करवाकर दिया। इसके बाद अकरम राही ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। और इस तरह गायकी का यह सफर पूरी दुनिया में फैल गया, जो आज तक जारी है…।

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