डीजे किंग सुरजीत बिंदरखिया

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Surjit Bindrakhia

इस कॉलम के तहत हम आपको पंजाबी के पुराने गायक, एक्टर और अन्य कलाकारों से मिलवाएंगे। इनके बारे में आपको जानकारी देंगे हिंदी के युवा कवि और पत्रकार एन नवराही। प्रस्तुत है कॉलम की पहली किस्त…

जिन गायकों ने पंजाबी गायकी को बुलंदियों पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, उनमें सुरजीत बिंदरखिया का नाम प्रमुख है। लगभग तीन दर्जन कैसेटें पंजाबी संगीत को देने वाले इस गायक ने लंबी हेक लगाकर वर्ल्ड रिकाॅर्ड भी बना दिया। उनके कुछ गीत इतने हिट हैं कि अपने गाए जाने के समय से लेकर आज तक ब्याह-शादियों में बज रहे हैं। उन्हें सुनने पर हर बार उतना ही मज़ा आता है, जितना मज़ा किसी गीत को पहली बार सुनने में आता है।
बहुत ही सुरीली आवाज़ के इस मालिक सुरजीत बिंदरखिया का जन्म 1962 को पहलवान पिता के घर रूप नगर में हुआ था। पिता पहलवान थे, इसलिए चाहते थे कि बेटा भी पहलवानी करे। मगर तकदीर के आगे किसी की नहीं चलती। शुरू-शुरू में पिता के कहने पर सुरजीत ने पहलवानी करने की कोशिश की, मगर बात नहीं बनी। कॉलेज टाइम में भंगड़ा टीम के कप्तान रहे। कॉलेज के ही किसी कार्यक्रम में बोलियां गाने से बिंदरखिया की गाने की रस्मी शुरुआत हुई। इसके बाद वह कॉलेज में होने वाले यूथ फैस्टिवलों की जान बन गए। इन फैस्टिवलों में उन्होंने ख़ूब गाया और भंगड़ा डाला।
इससे पहले वह सुरजीत सिंह बैंस के नाम से जाने जाते थे। जैसे ही अपनी पहली कैसेट ‘मंुडे आखदे पटाका’ से वह कैसेट कल्चर में शामिल हुए, तो सुरजीत बिंदरखिया के नाम से संगीत फलक पर छा गए। बहुत जल्दी वह उंगलियों पर गिने जाने वाले मशहूर गायकों की श्रेणी में शुमार हो गए। उनके गाए गीताें के जादू का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका ‘एत्थे मेरी नत्थ डिग पई…’, तेरे च तेरा यार बोलदा, ‘दुपट्टा तेरा सत्त रंग दा’, ‘सानूं टेडी टेडी तकदी तूं…’, और ‘वे मैं तिड़के घड़े दा पाणी…’ जैसे गीत आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलते हैं।
जिस समय िबंदरखिया ने पंजाबी गायकी के क्षेत्र में प्रवेश किया, उस समय उदास लहज़े वाले गीतों का दौर था, मगर उन्होंने अपने गीतों में भंगड़ा बीट, जुगनी, मिर्जा़, बोलियां और टप्पों का उपयोग करके श्रोताओं को अलग तरह का रस प्रदान किया। ‘अड्डी उत्ते घंुम’ कैसेट में उन्होंने पांच तर्जों़ की जुगनी के आगे 28 सैकेंड लंबी हेक लगाई थी, जो एक रिकॉर्ड है। अतुल शर्मा के संगीत निर्देशन में उन्होंने ज़्यादातर शमशेर संधू के लिखे गीत गाए। उनका अंतिम गीत ‘मैं तिड़के घड़े दा पाणी, मैं कल्ल तक नई रहणा…’ भी शमशेर संधू का ही लिखा हुआ है। डीजे का किंग कहे जाने वाला यह गायक 2003 को सदा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गया, मगर उनके गाए गीत रहती दुनिया तक लोगों का मनोरंजन करते रहेंगे।
— नव्यवेश नवराही
navrahi@gmail.com

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