निधि सिंह : दूसरी फिल्मों से अलग नज़र आती है ये फिल्म

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nidi singh

needhi-singh-reviewनिधि सिंह गांव में रहने वाली एक औरत के जीवन की सच्ची कहानी है, जो अपने मां-बाप की आंखों का तारा थी। वे उसे बेटों की तरह पालते हैं। पर बाद में उसे एक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जहां उससे सामाजिक बुराई का सामना करना पड़ता है। वे इसके लिए लड़ाई लड़ते हुए अपना आत्मविश्वास नहीं खोती। वे उससे तब तक लड़ती है, जब तक उस बुराई पर जीत हासिल नहीं कर लेती।
फिल्म की कहानी जैवी ढांडा ने लिखी है जो औरत नायिका पर आधारित है। फिल्म के पहले हिस्से में नायिका के जीवन का खुशनुमा हिस्सा दिखाया गया है। जबकि दूसरे हिस्से में वे पूरी मजबूती के साथ प्रस्तुत होती है। हालांकि स्क्रीनप्ले में थोड़ी कमी रह गई है। कुछ सीन यथार्थ से दूर हो गए हैं। इसके बावजूद फिल्म की कहानी एक सच्ची कहानी पर आधारित है।
उदाहरण के तौर पर फिल्म के क्लाइमेक्स की घटना पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। जैसे बिना किसी हथियार के एक औरत बीस गुंडों से मुकाबला कैसे कर सकती है?
प्रतीक सिंह राय और गौरव भल्ला के लिखे डायलॉग अच्छे हैं और फिल्म के मूढ़ के अनुसार हैं। फिल्म में सिर्फ दो गीत ही हैं।
पॉलीवुड में जैवी का ये डायरेक्टोरियल डेब्यू है। जैवी ने अच्छी शुरुआत की है। पर कहीं कहीं कुशलता की कमी भी दिखी है, जिसे उन्हें अपने अगले काम में सुधारना होगा।
इस फिल्म में कुलराज रंधावा लंबे समय बाद पर्दे पर दिखीं हैं। हालांकि निधि सिंह के रूप मंे उन्होंने दमदार किरदार निभाया है। निमल ऋषि का रोल भी अच्छा है। बस आशीष दुग्गल की परफोर्मेंस में कुछ कमी गई है। सिनेमेटोग्राफी अच्छी है। कुल-मिलाकर निधि सिंह पंजाबी में बन रही अन्य फिल्मों से अलग खड़ी जरूर नज़र आती है।

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