पद्मावती के विरोध में खड़े हुए कई राज्य, पक्ष के केवल फिल्म मेकर

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पद्मावती फिल्म के दृश्य

फिल्म पद्मावती के विरोध में जगह जगह प्रदर्शन जारी हैं। अब तो पूरे देश में फिल्म के विरोध के स्वर उठने लगे हैं। राजस्थान से शुरू हुआ ये विरोध अब मध्य प्रदेश और हब हिमाचल में भी पहुंच चुका है।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के यूथ विंग ने चेताया है कि अगर हिमाचल में इस फिल्म को चलाया गया तो इसका किसी भी हद तक विरोध किया जाएगा।
बस्सी कहलूर में यूथ विंग के अध्यक्ष सूरज प्रताप सिंह चंदेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि भंसाली ने इस फिल्म के जरिये राजपूताना इतिहास के छेड़छाड़ की है।

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पद्मावती फिल्म के दृश्य


राजपुताना इतिहास से किया मजाक

फिल्म में जिस प्रकार से रानियों को दिखाया गया है, उसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता है। जिस प्रकार से रानियां परदे में रहती थीं, ठीक उसी प्रकार से राजपूतों की पत्नियां व राजस्थान में राजघराने की महिलाएं आज भी परदे में ही रहती हैं। लेकिन भंसाली ने इतिहास से छेड़छाड़ राजपूताना इतिहास को लोगों के बीच हास्य के पात्र के रूप में प्रस्तुत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा कि फिल्म पर रोक नहीं लगाने तक क्षत्रिय महासभा की ओर से इसका विरोध जारी रहेगा। वहीं उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि हिमाचल में इसके बावजूद फिल्म का प्रसारण किया जाता है तो महासभा इसके विरोध में कड़े कदम उठाने को बाध्य होगी।

मध्य प्रदेश में भी विरोध
उधर मध्य प्रदेश में मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह ने घोषण की है कि यहां पद्मावती फिल्‍म नहीं दिखाई जाएगी। इस मामले में वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस फिल्म से विवादित दृश्य हटाने के आदेश देने की मांग की है। साथ ही फिल्म के निर्माता निर्देशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सीबीआई जांच की मांग भी की है।

शिव सेना ने भी कहा
शिवसेना ने भी कहा है कि यदि राजपूतों को किसी दृश्य से आपत्ति है तो फिल्मकार संजय लीला भंसाली को उसे हटाना चाहिए। सोमवार को अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने भंसाली से बात भी की।

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