फैमिलीमैन हूं..

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पंजाबी म्यूजि़क इंडस्टरी में गिप्पी गरेवाल अपने खास अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं।

आप एक्टिंग और गायन दोनों क्षेत्रों में समान रूप में सक्रिय हैं। दोनों में आपका खास मुकाम भी है। कैसा लगता है?
बहुत अच्छा लगता है। मैंने गायकी से ही अपने करिअॅर की शुरुआत की और अब एक्टिंग तक पहुंचा हूं। इस मुकाम तक पहुंचने क दौरान ऐसी चीज़ें मिली हैं, जिनके बारे में कभी सोचा भी नहीं था। अभी कुछ देर पहले ही गुरप्रीत घुग्गी से बात कर रहा था, तो पता चला कि उन्होंने भी अपने शुरुआती जीवन में बहुत संघर्ष किया है।
आप खुद को एक्टिंग के ज्यादा नज़दीक पाते हैं या संगीत के?
दोनों चीज़ें एक ही तरह की हैं। आज भी फिल्म आने से पहले उसका संगीत रिलीज़ हो जाता है। मैं अपने आप को खुशकिस्मत मानता हूं कि मैं इन दोनों विधाओं से जुड़ा हुआ हूं। एक ही समय गाने का भी मौका मिलता है और एक्टिंग का भी।
संगीत की तरफ कैसे आना हुआ?
संगीत का पैशन बचपन से ही मेरे दिमाग में था। बचपन से ही गाना शुरू कर दिया था। स्टेजों पर गाता था। स्ट्रगल शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह पैशन बढ़ता गया। सन १९९८ में मैंने अपनी पहली एलबम पर काम करना शुरू कर दिया था, जो २००० में रिलीज़ हुई।
पहली फिल्म का सबब कैसे बना?
जब पंजाबी फिल्मों का अच्छा दौर शुरू हुआ, तो मुझे भी कुछ फिल्मों के ऑफर आए। लेकिन उसमें सही रोल ना होने के कारण मैंने मना कर दिया। फिर २०१० में अच्छी फिल्म मिली ‘मेल करा दे रब्बा’। इसमें मेरा रोल छोटा था। इसमें जिम्मी शेरगिल भी थे। मैंने सोचा कर लेते हैं। अगर फिल्म चल गई तो अपना भी नाम हो जाएगा। अगर ना चली तो जिम्मी का ही नाम लगेगा। (हंसते हैं) लकली फिल्म चल निकली और मुझे और फिल्मों के लिए ऑफर आने लगे।

पंजाबी सिनेमा पर नज़र डालें, तो लगता है यह ग्रो कर रहा है। बारीकी से देखें, तो अभी भी बहुत कुछ है, जो करने वाला है। आप क्या सोचते हैं?
मुझे लगता है एक्टर भी तभी ग्रो करता है जब सिनेमा ग्रो करता है। बाकी एक तरीके से सभी फील्ड में ऐसा ही है। ईंवन बॉलीवुड में भी ऐसा ही है। बाकी हम अभी बेसिक पर ही हैं। अभी कुछ ही साल हुए हैं पंजाबी सिनेमा को रिवाइव हुए। मुझे लगता है आने वाले समय में सिनेमा और ग्रो करेगा। यह तभी संभव है, जब अलग-अलग जोनर की फिल्में बननी शुरू होंगी। हमने भी कुछ हटकर कंसैप्ट प्लान किए हैं।
निजी तौर पर गिप्पी गरेवाल को कैसा संगीत पसंद है?
मुझे हर तरह का संगीत पसंद है। खास तौर पर पंजाबी के पुरानी गीत मुझे बहुत पसंद हैं। अमर सिंह चमकीला, मुहम्मद सदीक और कुलदीप माणक साहिब का मैं फैन हूं। यहां तक कि नए लोगों के गीत भी मैं ज़रूर सुनता हूं। सिर्फ गायक होने के नाते ही मैं उनके गीत नहीं सुनता, असल में मैं संगीत से प्यार करता हंू।
और फिल्में?

एक $खास बात आपको बता दूं कि जैसी फिल्में मैं कर रहा हूं, वैसी फिल्में निजी तौर पर मुझे पसंद नहीं हैं। मैंने अपनी फिल्में भी दो बार से ज़्यदा नहीं देखी होंगी। असल में मैं चाहता था कि मैं अलग तरह के रोल करूं। थ्रिलर और एक्शन फिल्में मुझे ज़्यादा अच्छी लगती हैं, लेकिन पंजाबी सिनेमा में अभी यह दौर नहीं आया। मेरी इच्छा ज़रूर है कि मैं ऐसी फिल्में बनाऊं।
कोई ऐसी फिल्म या रोल है, जिसे देखकर लगा हो कि अगर यह मैं करता तो ज़्यादा अच्छा करता। या फिर यह तो मुझे ही करना चाहिए था?
ऐसा तो कुछ नहीं। जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि कभी-कभी कोई रोल बहुत अच्छा लग जाता है। जैसे शाहरुख खान की ‘बाज़ीगर’ मुझे बहुत पसंद है। उसमें शाहरुख जी के किरदार का शेड मुझे बहुत पसंद आया है।
संगीत और एक्टिंग को छोड़ दें, तो एक आम गिप्पी गरेवाल क्या हैं?
फिर मैं एक फैमिलीमैन हूं। जब मैं कुछ नहीं करता तो फैमिली के साथ समय बिताना मुझे बहुत अच्छा लगता है। बच्चों को छुट्टी हो तो उनके साथ छुट्टी मनाता हूं।

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