ब्याह शादियों में बहुत भंगड़ा डाला..दिलजीत दोसांझ

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आपने करिअर के सफर को किस तरह बयान करेंगे?

मेरी पहली एलबम सन 2002 में आई थी। मैं तो परमात्मा का शुक्र अदा करता हूं। नहीं तो मेरी इतनी औकात नहीं थी कि मुझे इतना बड़ा मुकाम मिलता।

फिल्म मिलने का सबब कैसे बना?

मेरी एलबम का गीत ‘पहलां लड़ीदा नईं…’ गुड्डू धनोआ जी ने देखा। उन्होंने मुझे फोन किया कि मैं तुम्हें लेकर फिल्म बनाना चाहता हूं। क्या आप काम करेंगे। पहले तो मैंने इसे मज़ाक समझा। फिर मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि गुड्डू जी तो बॉलीवुड की बहुत बड़ी श$िख्सयत हैं। कई कलाकारों को उन्होंने इंट्रोड्यूस कराया है। मैंने उन्हें कहा कि मैंने कभी काम किया नहीं है। अगर आपको लगता है, मैं काम कर सकता हूं तो मैं तैयार हूं। बस इसी तरह फिल्म बनी और बल्ले बल्ले हो गई।

हलांकि आप एलबम्स के लिए पहले भी कैमरा फेस कर चुके थे, लेकिन जब पहली बार फिल्म के लिए कैमरा फेस किया तो कैसा लगा? यह भी कि आपसे पहले किसी पगड़ीधारी को बतौर हीरो इतना फेम नहीं मिला, जितना आपको मिला?

पगड़ी बांधकर मैंने कभी यह नहीं सोचा कि लोगों को कैसा लग रहा हूं। मुझे तो बस इतना पता है कि मैं सुंदर लगता हूं। स्कूल में भी जो लडक़े पगड़ी बांधते थे, वो मुझे सुंदर लगते थे। इसलिए मैं पगड़ी बांधता हूं। मेरा भाई पगड़ी नहीं बांधता। मैं इसलिए भी बांधता हूं, क्योंकि मुझे अच्छा लगता है। रही बात पहली बार कैमरा फेस करने के बारे में, तो मुझे बड़ा स्वाद आया। उन्होंने मुझसे कहा कि यह बोल दो, मैंने बोल दिया। जब मैं कैमरे के सामने होता हूं तो सोचता हूं मैं हूं और कैमरा ही है। बाकी सबको मैं भूल जाता हूं।

आपने कब सोचा कि आप सिंगर बनना चाहते हैं।

जब मैं छोटा था, तबसे ही सोच लिया था कि मैं सिंगर बनूंगा। मगर यह पता नहीं था कि बनना कैसे है। आजकल तो लोग समझदार हो गए हैं। उन्हें पता है कि करिअर के लिए क्या करना है। मेरे समय में यूट्यूब जैसे माध्यम भी नहीं होते थे। बस दोस्तों को ही पता होता था कि कोई गाता है। दूसरों को बताने का कोई माध्यम नहीं था। फिर मुझे फाइनटोन के रजिंदर सिंह मिले। मैंने उन्हें गीत सुनाया। तब मेरी पहली एलबम आई।

घरवालों का इस करिअर के प्रति क्या रवैया रहा?

मेरे घरवाले बहुत कूल हैं। उन्होंने मुझे कभी भी किसी काम से नहीं रोका। बचपन में जब मैं ऊंची आवाज़ में गाया करता था, तो वे कहा करते थे, कमरे में जाकर जितना मजऱ्ी गाओ, हमारे तक आवाज़ नहीं आनी चाहिए।

पढ़ाई में आप कैसे थे?

पढ़ाई में मैं ठीक था। बस अंग्रेज़ी और हिसाब में कमज़ोर था। एक बात बताऊं, मुझे परीक्षाओं में उतनी टैंशन पेपर देने की नहीं होती थी, जितनी घर आकर बड़ी बहन को यह बताने में होती थी कि मैंने पेपर में क्या-क्या लिखा। यानी पेपर करने के बाद मुझे ज़्यादा तैयारी करनी पड़ती थी। दरअसल, मेरी बड़ी बहन ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं।

आपने संगीत की शिक्षा भी ली?

जी हां, मैंने बकायदा तौर पर संगीत की शिक्षा ली है। पहले मैंने तबला सीखा। फिर हारमोनियम और फिर वोकल। स्कूल की भंगड़ा टीम में भी मैं रहा। टीम बनाते समय बड़ी रोचक बात हुई। उन्होंने मुझसे पूछा कि आपने पहले कभी भंगड़ा डाला है। आपका कोई एक्सपीरियंस है। मैंने तपाक से कहा, बिल्कुल मैंने ब्याह-शादियों में बहुत भंगड़ा डाला है और यही मेरा एक्सपीरियंस है… (हंसते हैं)।

बचपन में किन गायकों को सुनते थे?

इस फील्ड में आने से पहले मैं सबको सुनता था। जब मैं इस इंडस्ट्री में आया तो मुझे मनमोहन वारिस सबसे पहले पसंद आए। इसके बाद जब मैंने गुरदास मान को सुना तो मुझे लगा, इनसे ऊपर कोई नहीं हो सकता। मैंने सभी सीडीस फेंक दीं। मेरी गाड़ी में केवल गुरदास मान जी के गीत ही बजते। …आज भी नए और पुराने गायकों का ज़ोर लग जाता है, पर वे मान साहिब जी के आस-पास भी नहीं पहुंच पाते।

आपकी फिल्म ‘जिन्ने मेरा दिल लुट्टेया’ हिट रही। उसमें गिप्पी गरेवाल के साथ आपकी अच्छी कैमिस्ट्री दिखी। सुना है अब आपके रास्ते उनसे अलग हो गए हैं?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैं गिप्पी जी का बहुत सम्मान करता हूं। काफी देर से उनके साथ काम करने का सबब नहीं बना। जब बना तो मैं ज़रूर उनके साथ काम करूंगा। वह अपने काम के प्रति बहुत सिंसियर हैं, सीरियस हैं। मैं उनके इस गुण की कद्र करता हूं।

आपकी फिल्म ‘जट्ट एंड जूलियट’ पहली और दूसरी हिट रहीं। क्या पार्ट थ्री बनाने की योजना भी है?

इसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। यह प्रोड्यूसरों का मामला है। मैं कोई फिल्म प्रोड्यूस नहीं करता। मैं तो पैसे लेकर काम करता हूं।

आप खुद को सिंगर ज्यादा मानते हैं या एक्टर?

मैं खुद को सिंगर मानता हूं। इसी से ही मेरी पहचान है। मैं अब भी सिंगल ट्रैक्स पर काम कर रहा हूं। बैसाखी पर भी मेरा नया धार्मिक गीत आएगा।

फिल्म ‘डिस्को सिंह’ में आपका क्या रोल है?

इसमें मैं एक स्ट्रगलर सिंगर बना हूं, जिसका नाम लाटू है। जैसी मेरी लाइफ है, वैसा ही कैरेक्टर है यह।

कोई ऐसी फिल्म, जिसका कैरेक्टर आपको बहुत पसंद आया हो और आप उसे करना चाहें?

फिल्म ‘शहीद-ए-मोहब्बत’ वाला गुरदास मान जी वाला कैरेक्टर मुझे बहुत अच्छा लगता है। जहां तक मेरे करने का सवाल है, मुझे उसके लिए स्पैशल मेहनत करनी पड़ेगी अगर करना चाहूं तो…। मुझे वह रोल बहुत पसंद है।

बॉलीवुड से किसी फिल्म के लिए प्रोपोज़ल आए तो काम करना चाहेंगे?

अगर अच्छा प्रस्ताव मिला, तो ज़रूर करना चाहूंगा।

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CineDunya Desk

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