Published On: Sun, Oct 28th, 2018

मैं तो एक साधारण-सा व्यक्ति हूं…

फिल्मों की तरफ रुझान कैसे हुआ?
जब से होश संभाला, मैंने पाया कि मैं गाता हूं। स्कूल में भी गाता रहा। मलेरकोटला में जब कॉलेज में दाखिल हुआ, तो सब्जैक्ट लिया संगीत। इस दौरान मैंने सोचा कि स्टेज पर सिंगिंग के अलावा भी कुछ करना चाहिए, तो मैं एक्टिंग की तर$फ आया। फिर पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में रहते हुए मैंने प्ले करने शुरू कर दिए। इसके बाद तो एक्टिंग की ऐसी लगन लगी कि सिंगिंग पीछे रह गई और मैं एक्टिंग की ओर चल पड़ा।
कभी गाया भी किसी फिल्म में…
किसी फिल्म में तो मौका नहीं मिला, लेकिन मुझे इतना पता है कि मैं अच्छा गा लेता हूं। पंजाबी गीत, गज़लें, लोग-गीत मैं गा सकता हूं। रागों में भी गा लेता हूं, पर यह टेलेंट शो नहीं किया मैंने कभी। मेरा ज़्यादा ध्यान एक्टिंग की तरफ चला गया।
फिल्म में एक्टिंग का पहला मौका कैसे मिला?
पहला रोल मैंने पंजाबी फिल्म ‘चन्न परदेसी’ में किया था। उस समय मैं नाभा के एक कॉलेज में पढ़ाता था। प्रोड्यूसर पटियाला के थे और मेरे दोस्त थे। कह सकते हैं कि यह फिल्म शुरू ही मैंने करवाई थी। चंडीगढ़ में मेरे लेखक दोस्त बलदेव गिल ने मुझे कहानी सुनाई और फिल्म बनाने की इच्छा ज़ाहिर की। मेरा दूसरा दोस्त एक्टर योगराज भी फिल्म बनाने की बात मुझसे कर चुका था। मैंने दोनों को मिला दिया और ‘चन्न परदेसी’ फिल्म बनाने की योजना बन गई। फिर उन्होंने मुझे भी इस फिल्म में किरदार निभाने का मौका दिया। यही मेरी पहली फिल्म थी।

पहले दिन जब कैमरा फेस किया तो कैसा अनुभव रहा?
जब कैमरे के सामने काम करने का मौका आया, तब तक मैं ग्यारह साल तक स्टेज पर एक्टिंग कर चुका था। इसके बावजूद जब मैंने कैमरे का सामना किया, तो कॉन्शिययस हो गया था। इतना कॉन्फिडेंस होने के बावजूद…पर अब तो कैमरे के साथ गहरी दोस्ती हो चुकी है।
आप बहुत अच्छे एक्टर रहे हैं, कॉमेडी भी की है और विलेन का किरदार भी निभाया। किस काम में आपको ज़्यादा मज़ा आया?
मैं सोचता हूं एक एक्टर हो कैरेक्टर में घुस जाना चाहिए। तब हर रोल निभाने में उसे मज़ा आएगा। मैं जब भी कोई कैरेक्टर करता हूं तो पिछला सबकुछ भूलकर करता हूं। आय लव एक्टिंग और इसे पूरा इंजॉय करता हूं।
आपको नहीं लगता कि आजकल की फिल्मों में कॉमेडी ज़्यादा हावी हो रही है?
जब कोई ट्रैंड चलता है, तो पंजाबी सिनेमा पर उसका प्रभाव पडऩा ज़रूरी है। हॉलीवुड में भी कॉमेडी फिल्में बनी। फिर बॉलीवुड में भी कॉमेडी का ट्रैंड चल रहा है। यही चीज़ पंजाबी सिनेमा में भी आ गई। हिंदी सिनेमा में भी पहले डाकुओं की फिल्में बनती थीं। फिर सोशल ड्रामा बननी शुरू हुईं। मैंने देखा है कि बॉलीवुड में चलने वाले टें्रड का असर पंजाबी सिनेमा पर भी पड़ता है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि सिर्फ कॉमेडी ही बनेंगी। अब ट्रेंड चेंज हो रहा है। पंजाबी में भी अलग-अलग जोनर की फिल्में बननी शुरू हो चुकी हैं। पंजाबी सिनेमा को दोबारा शुरू हुए अभी ज़्यादा समय नहीं हुआ। आप देखेंगे, इसमें जल्द ही ट्रेंड बदलेंगे और पंजाबी सिनेमा और ग्रो करेगा।
यह ठीक है कि पंजाबी सिनेमा ग्रो कर रहा है। पर कहीं-कहीं यह नहीं लगता कि ज़्यादातर पंजाबी फिल्मों में स्टोरी की कहीं ना कहीं कमी होती है?
देखिए, सिनेमा में आने का कोई क्राईटीरिया नहीं है। जब कोई फिल्म बनाने की सोचता है, तब यह उसकी समझ पर निर्भर करता है कि वह कैसी फिल्म बनाएगा। जब कोई नया इस फील्ड में आता है तो निश्चित कई चीज़ों की कमी रह जाती है। कई बार इस फील्ड में आए लोग स्टोरी पर काम नहीं कर पाते। इसलिए इस तरह की कमी रह ही जाती है, जो बाद में दर्शकों को भी खलती है। किसी भी फिल्म का बेस उसकी स्टोरी ही है। आप समझ लें कि जो पैसा लगता है, उसी बेस पर ही लग रहा होता है। अगर वही नहीं होगा, तो सारा काम कैसे होगा। इसलिए स्टोरी पर ध्यान देना बहुत ही ज़रूरी है।
क्या पॉलीवुड फिल्मों में डायरेक्टर या एक्टर के काम में प्रोड्यूसर का ज़्यादा दखल नहीं होने लगा?
देखिए, आज से कुछ साल पहले ऐसा बिल्कुल नहीं था। तब डायरेक्टर का अपना एक प्रभाव होता था और लोग डायरेक्टर के नाम पर फिल्म में काम करते थे। अगर इस नज़रिए से देखूं, तो मुझे लगता है आजकल फिल्में नहीं बनती कम्बीनेशन बनते हैं। एक आदमी कहता है कि यह स्टोरी ले लो, इस डायरेक्टर को लो और फलां हीरो या हीरोइन को ले लो और फिल्म बना दो। डायरेक्टर का प्रभाव बिल्कुल कम हुआ है, शायद इसी लिए आोवरऑल देखें, तो फिल्मों का स्तर गिरा भी है।
निजी जीवन में राणा जंग बहादर क्या हैं?
मैं सोचता हंू, जो व्यक्ति अपने बारे में बोलता है, वह समझदार नहीं है(हंसते हैं)। मैं तो एक साधारण-सा व्यक्ति हूं, जो ऊपर वाले की रज़ा में रहना पसंद करता हूं। इस दुनिया की स्टेज पर अपना पार्ट अदा कर रहा हूं।
परिवार में कौन-कौन हैं?
परिवार में मेरी पत्नी और मेरा बेटा है। मेरी वाइफ कॉलेज में पढ़ाती हैं और बेटा बॉलीवुड में डायरेक्टर राजकुमार संतोषी का असिस्टेंट है। वैसे उसने अमरीका से कंप्यूटर इंजीनियर की शिक्षा हासिल की हुई है, पर करिअॅर फिल्मों में बनाना चाहता है।

About the Author

Reetu Kalsi

- Reetu Kalsi is a famous journalist and punjabi story writers. can be reach at reetukalsi@gmail.com

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