हरजीता : अच्छी कहानी पर बढ़िया फिल्म…

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हॉकी पर बनी फिल्म ‘खिंदोखुंड़ी’ देखकर जितनी निराशा हुई थी उस से ज्यादा खुशी ‘हरजीता’ देख कर हुई। सिनेमा हाल से निकलकर मुंह से खुद-ब-खुद वाह निकला।

इकबाल सिंह चाना

फिल्म की कहानी भारतिय हॉकी टीम के 22 साल के खिलाड़ी हरजीत सिंह भुल्ली के जीवन से प्रेरित है, जिसकी कप्तानी में जूनियर हॉकी टीम ने 2016 में विश्व कप जीता था और हरजीता को प्लेयर ऑफ टूरनामेंट के खिताब से नवाजा गया था। परिवारिक आर्थिक तंगी से जूझते हुए कैसे हरजीत ने हॉकी में बुलंदियों को छुआ, यह इस फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म में उसके संघर्ष को बाखूबी फिलमाया गया है। मैं फिल्म की कहानी की बात नही करूंगा पर पुरजोर सिफारिश करूंगा कि लोग थिएटर में जाकर फिल्म देखें।
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किसी खेल पर फिल्म बनाना असान काम नहीं है। पर फिल्म के निर्देशक और लेखक जगदीप सिंह सिद्धू ने फिल्म की स्क्रिप्ट और पेशकारी पर जो मेहनत की है, वो बॉलीवुड फिल्म ‘चक्क दे इंडिया’ से कहीं भी कमतर नहीं है। लेखक ने सक्रीनप्ले पर काफी मेहनत की है। मैंने पिछले दिनों एक फिल्म की समीक्षा करते हुए लिख दिया था कि सक्रीनप्ले ढीला है, तो पंजाबी सिनेमा का कमिटेड माफिया मेरे पीछे हाथ धोकर पड़ गया था। मैं उनसे गुजारिश करूंगा ‘हरजीता’ देखकर आएं, उन्हें भी पता चले कि एक फिल्म को संभालने में एक लेखक का कितना बड़ा हाथ होता है। फिल्म के लेखक को स्करिपट और स्वाभिक लगने वाले डॉयलाग के लिए बधाई। डायरेक्टर विजय अरोड़ा भी उतनी ही बधाई के हकदार हैं। विजयअरोडा बॉलीवुड के मशहूर कैमरामैन हैं।
इसलिए ‘हरजीता’ में खूबसूरत फोटोग्राफी देखने को मिलती है। बंटी नागी की चुस्त एडीटिंग का भी योगदान नकारा नही जा सकता। फिल्म कहीं भी बोर नही करती।
ऐम्मी विर्क का इसमें सरवोतम रोल कहा जा सकता है। उसकी मेहनत नजर आती है। वह कहीं भी गायक एम्मी विर्क नहीं लगा। पूरी फिल्म मे ‘हरजीता’ ही लगा है। हरजीते के बचपन का रोल अदा करने वाले बाल कलाकार समीप ने मन जीत लिया। हरप्रीत कौर भंगू कमाल की अभिनेत्री हैं। हरजीते में मां के रोल में जान डाल दी। हिरोइन सावन ने भी अपना रोल बखूभी निभाया है। कोच के रोल में पंकज त्रिपाठी का काम भी काबिले-तारीफ है। प्रकाश, जरनैल, हरमन अपने काम में ठीक ठाक हैं।
फिल्म के संगीतकार गुरमीत सिंह का संगीत भी अच्छा है। पंजाबी दर्शको को एक बढ़िया फिल्म देने के लिए फिल्म के निर्माता निक बहल, भूषण चोपड़ा, मनीश साहनी, भगवंत विर्क भी बधाई के हकदार हैं।
अंत में एक बात और, हम अपना राष्ट्रीय खेल हॉकी को दुबारा जीवन देने के लिए यत्नशील हैं। पंजाब सरकार को इसे टेक्स फ्री करना चाहिए और स्कूलों में यह फिल्म दिखाई जानी चाहिए।

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