Published On: Sun, Feb 4th, 2018

विदेश में बसने के बावजूद सभ्याचारक गीत ही गाते हैं एएस कंग

आज भी गाना- गिद्देयां दी राणीए नी गिद्दे विच्च आ… सुनेंगे, तो कानों में रस घुल जाएगा।

– एन नवराही

कुछ गीत सदा बहार होते हैं। उनकी ताज़गी, उनका नयापन समय बीतने के बावजूद बना रहता है। वे फीके नहीं पड़ते। जब भी सुनो, अच्छा लगता है। ऐसे ही गीत गाने वाले एक गायक और गीतकार हैं— अवतार सिंह कंग, जो संगीत की दुनिया में एएस कंग के नाम से जाने जाते हैं। नई पीढ़ी भले इनके नाम से वाकिफ़ न हों, मगर इनके गीतों से नावाकिफ नहीं हो सकती। इनका सबसे मशहूर गीत— “गिद्देआं दी राणीए नी गिद्दे विच्च आ…’ आज भी कानों में पड़ जाए ताे रस घोल देता है। इसके बाद भी बहुत सारे गायकों ने इस गीत को अपनी-अपनी आवाज़ में गाया, मगर जो बात इस असल गीत में है, वो बात किसी और गीत में नहीं बन पाई। इनका नाम न सुने जाने का एक कारण उनका बहुत पहले विदेश में बस जाना भी हो सकता है। हालांकि उनकी स्कूली पढ़ाई यहीं लुधियाना में ही हुई। सन 1993 में एएवस कंग के मशहूर गीतों की कैसेट “फ्लैश बैक’ लॉन्च हुई।
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लुधियाना के एक गांव में हुआ था जन्म
बहुत सारे मीठे गीत पंजाबी संगीत की दुनिया को देने वाले इस गायक का जन्म लुधियाना के गांव कोलथ में 31 दिसंबर 1949 को हुआ। स्कूली शिक्षा गांव के ही स्कूल से हासिल करने के दौरान ही परिवार इंग्लैंड शिफ्ट हो गया। यहां स्कूल में होने वाले कार्यक्रमों में अध्यापक कंग को गाने के लिए कहते और वह गा देते। मगर घर वालों को इस तरह गाना पसंद नहीं था।

इंग्लैंड में ऐसे जगा दोबारा गाने का शौक
जब इंग्लैंड गए तो वहां एक धर्मिक कार्यक्रम में ज्ञान सिंह सुरजीत को गाते देखकर गाने का शौक फिर जाग उठा। तब गाया तो नहीं, एक गीत लिखा और अपने दोस्त की शादी पर गा दिया। लागों ने वो गीत बहुत पसंद किया। यह बात सन 1967-68 की है। उसी दौरान वहां एक संगीत ग्रुप में शामिल हो गए। कार्यक्रमाें में गाने लगे। पहले तो लाेगों को ज़्यादा पता नहीं चला, मगर जब गीतों की कैसेट मार्केट में आई, तो लोग प्रशंसा करने लगे। संगीत के लिए लालचंद यमला जट्‌ट को उस्ताद बनाया। जब भी भारत आते, तो उनसे संगीत की बारीकियां सीखते।

विलायती बोलियों की शुरुआत की
जब गाना शुरू किया, तब दोगाना गायकी का दौर था। प्रीति बाला, सुरिंदर कौर, महिंदर कौर भंवरा और परमजीत पम्मी आदि गायिकाओं के साथ गाए उनके गीत आज भी लोगों की ज़बान पर हैं। एएस कंग मानते हैं कि संगीत का जीवन में बहुत बड़ा रोल होता है। इसलिए ऐसे गीत गाने चाहिए जो परिवार में बैठकर सुने जा सकें। देसी और वलायिती बोलियां गाने वाले भी कंग पहले गायक हैं।

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पहले एचएमवी कंपनी ने कैसेटें लॉन्च कीं। जब इंग्लैंड गए तो वहां रोमा कंपनी के माध्यम से विदेशों में बसे पंजाबी श्रोताओं के लिए एलबमें बनवाईं। नई पीढ़ी ने इनका नाम इसलिए ज़्यादा नहीं सुना चूंकि इंग्लैंड जाने के बाद इनकी इंडिया में कोई एलबम रिकॉर्ड नहीं हुई। भारत में इनकी केवल 1978 से 1988 तक की रिकॉर्डिंग मिलती है। इसी लिए यहां इनके ज़्यादा कार्यक्रम भी नहीं हुए। मगर संगीत से प्रेम करने वाले आज भी एएस कंग के गीत सुनते हैं। पारिवारिक मुश्किलों के कारण कुछ देर लिखना और गाना छोड़ दिया था, मगर अब फिर सक्रिय हो गए हैं नई एलबम पर काम कर रहे हैं।

About the Author

N Navrahi

- is a well known journalist and Punjabi Poet. Can be reach at navrahi@gmail.com

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